कल्पना करो.....!!

कल्पना करो तुम किसी 
नदी की धारा में पैर डालकर बैठे हो,
साथ में आत्मीय प्रेयसी है, 
जो आपके समकक्ष विचार 
रहित अवस्था को प्राप्त है,
आपके हाथों में उसका हाथ हो
और पानी की शीतलता की बात हो, 
उमड़ते - घुमड़ते विचार रहित 
जिंदा जज्बात हो, ये प्रेम है,
क्या मूल्य चुकाया आपने ? 
एक कौड़ी भी नहीं, 
लेकिन यह अमूल्य है..!!

पँखराज....!!

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